10 Jun 2026 65 Views
रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रियायती और लीज दरों पर जमीन आवंटित कराने के बाद भी सालों तक उद्योग स्थापित न करने वाले करीब 800 उद्योगपतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआइडीसी) ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। निगम ने इन सभी उद्योगपतियों को अंतिम कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आवंटित जमीन की लीज तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी। निगम ने इनमें से करीब 250 उद्योगपतियों से जमीन वापस लेने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राजधानी रायपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे उरला, सिलतरा और प्रदेश के अन्य जिलों में कई बड़ी और मध्यम कंपनियों ने उद्योग लगाने के नाम पर बेशकीमती जमीनें तो अपने नाम करा ली हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं किया। इतना ही नहीं, इनमें से कई कंपनियां लंबे समय से नियमानुसार सरकारी टैक्स का भुगतान भी नहीं कर रही हैं। दूसरी ओर, प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए साल 2024 से लेकर अब तक कुल आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश और समझौता प्रस्तावों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, परंतु विडंबना यह है कि केवल 6,000 करोड़ रुपये की योजनाओं पर ही धरातल पर काम शुरू हो सका है। वर्तमान में लगभग 219 परियोजनाएं ही क्रियान्वयन के विभिन्न प्रारंभिक चरणों में पहुंच पाई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में नए उद्योगों की वास्तविक स्थापना के मार्ग में आज भी भूमि अधिग्रहण, प्रभावितों का पुनर्वास, जटिल पर्यावरणीय मंजूरियां और स्थानीय स्तर पर कुशल श्रमिकों की भारी अनुपलब्धता सबसे बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन्हीं प्रशासनिक और सामाजिक कारणों से बड़े निवेश प्रस्तावों का सही तरीके से समय पर क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इस आठ लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों में अडानी समूह का कोरबा में ऊर्जा क्षेत्र में होने वाला 80,344 करोड़ रुपये का भारी निवेश भी शामिल है। इसके अलावा गरियाबंद में एनटीपीसी का करीब 6,000 करोड़ का हाइड्रो प्रोजेक्ट और रायपुर व आसपास (स्टेट कैपिटल रीजन) में प्रस्तावित 11 हजार करोड़ रुपये का हाईटेक डाटा सेंटर जैसे बड़े निवेश प्रस्ताव अब तक केवल कागजी घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। सीएसआइडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि उद्योग लगाने के लिए दो वर्ष का समय निर्धारित रहता है, लापरवाही बरतने वालों की लीज रद्द की जाएगी।