01 Aug 2026 41 Views
नई दिल्ली। GST नेटवर्क ने उद्योग जगत से मिले फीडबैक के बाद ई-वे बिल में किए जाने वाले दो प्रस्तावित बदलावों को फिलहाल रोक दिया है। 1 अगस्त से लागू होने वाले इन दो बदलावों में से पहला था बिल-टू-शिप-टू ट्रांजेक्शन में शिप-टू GSTN की जानकारी देना जरूरी किया गया था ताकि सामान पाने वाले असली व्यक्ति की पहचान और सामान की ट्रैकिंग आसान हो सके। दूसरा बदलाव सामान की आवाजाही नहीं होने की स्थिति में सक्रिय ई-वे बिल को बंद करने की सुविधा थी।
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि इन बदलावों की टेस्टिंग के दौरान कई कारोबारियों को पता चला कि प्रस्तावित शिप-टू GSTN की जरूरत और वालंटरी ई-वे बिल क्लोजर सुविधा को मौजूदा ई-इनवाइसिंग और आइआरएन आधारित ई-वे बिल सिस्टम के साथ लागू करना मुश्किल था।
अग्रवाल ने कहा, GST नेटवर्क का एडवाइजरी और एफएक्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) को वापस लेने का फैसला सिर्फ लागू करने की समयसीमा बढ़ाने की बजाय उद्योग जगत की बातों और मौलिक दिक्कतों को समझना है। इससे पता चलता है कि सरकार उद्योग जगत के फीडबैक के आधार पर इन बदलावों पर फिर से विचार कर सकती है।
GST के तहत 50,000 रुपये से ज्यादा कीमत का सामान ले जाने वाले व्यक्ति के पास ई-वे बिल होना जरूरी है। सामान ले जाने से पहले, GST पंजीकृत व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर को GST पोर्टल से यह दस्तावेज खुद जनरेट करना होता है। जब 1 जुलाई, 2017 को GST लागू किया गया तो राज्यों में मौजूद चेक पोस्ट खत्म कर दिए गए।
यह एक बड़ा ढांचागत सुधार था, जिससे सामान की आवाजाही आसान हुई और रास्ते में होने वाली देरी कम हुई। ई-वे बिल सिस्टम एक असरदार डिजिटल विकल्प के तौर पर सामने आया। इसने राज्य की सीमाओं पर दोबारा रुकावटें पैदा किए बिना सामान की आवाजाही की आनलाइन ट्रैकिंग को आसान बनाया और साथ ही कर प्रबंधन के लक्ष्यों को पूरा किया।